अनुसंधान एवं विकास

अनुसंधान एवं विकास
अनुसंधान विभाग :
परिचय:
आकाशवाणी का अनुसंधान विभाग देश में प्रसारण सेवार्थ के प्रचार अध्‍ययन और वैज्ञानिक आयोजन के मुख्‍य उद्देश्‍य से 1937 में गठित किया गया था। स्‍वतंत्रता-पश्‍चात् अवधि में प्रसारण नेटवर्क के लगातार विस्‍तार के चलते ध्‍वनि, आडियो प्रसारण इन्‍टरनेट, विडियो ट्रांसमिशन, आटोमेशन, सैटेलाइट माइक्रोवेव, प्रचार आदि के क्षेत्रों में विस्‍तृत अध्‍ययन और विकास कार्य चलाने के लिए विभाग का लगातार विस्‍तार किया गया है। टेलीविज़न के आने के बाद अनुसंधान विभाग की गतिविधियों को  इस क्षेत्र तक भी बढ़ा दिया गया था।
इस विभाग का मूल उद्देश्‍य आसानी से उपलब्‍ध नहीं हो सकने वाली प्रणालियों / उप-प्रणालियों के माध्‍यम से और अंतर्राष्‍ट्रीय मानकों के अनुरूप भारतीय प्रसारण को बनाए रखने के लिए नई सेवाएं और नई प्रौद्योगिकी शामिल करते हुए महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाकर देश में प्रसारण को सहयोग प्रदान करना है। इसके अलावा, एबीयू, ईबीयू, सीबीए, आईटीयू आदि से जुड़ी अंतर्राष्‍ट्रीय गतिविधियों के एक हिस्‍से के रूप में विभिन्‍न अध्‍ययन और अनुसंधान कार्य भी समय-समय पर चलाए गए हैं।
विभाग में कई समूह / प्रयोगशालाएं हैं जैसे ध्वनिक, टेलीमेट्री, प्रसारण, डीटीएच मॉनिटरिंग लैब, डीटीएच रेडियो लैब और डीआरएम लैब आदि। सभी प्रयोगशालाएं संबंधित विषयों में अच्छी तरह से सुसज्जित हैं। सभी तकनीकी समूह विशिष्ट अत्याधुनिक उपकरणों और प्रणालियों के डिज़ाइन और विकास के लिए जिम्मेदारी लेते हैं, जो व्यावसायिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं। गतिविधियों में विभिन्न अध्ययन शामिल हैं, नए उत्पाद विकसित करना, नई प्रणालियों का नवाचार करना और प्रसारण नेटवर्क में नई तकनीकों को शामिल करने में सलाह देना भी शामिल है। उपर्युक्‍त प्रमुख प्रयोगशालाओं के अलावा, कुछ सहायता सुविधाएं भी प्रदान की जाती हैं, जैसे कि प्रोटोटाइप उत्पादन, प्रलेखन, इंटरनेट / ब्रॉडबैंड, तकनीकी पुस्तकालय और अंतर्राष्ट्रीय मॉनिटरिंग और रिसीविंग स्‍टेशन।
मीवेट्रांसमीटर के डिज़ाइन, विकास और नियंत्रण की निगरानी और कार्यान्वयन, वीएलपीटी और 100 वाट के एफएम ट्रांसमीटर, डीटीएच रेडियो का विकास, स्वनिर्धारित रेडियो रिसीवर, रिसेप्शन सर्वे और डीटीटी और डीआरएम ट्रांसमिशन क्षेत्र की माप के लिए एसएमएस आधारित रिमोट मॉनिटरिंग और कंट्रोल सिस्टम,  दिल्ली-ए ट्रांसमीटर की डीसीसी सुविधा का रिसेप्शन और फील्ड सर्वेक्षण, बिजली की आपूर्ति की बचत, ध्वनिक सामग्री के परीक्षण और मूल्यांकन, आईएमआरसी, टोडापुर की नियमित मॉनीटरिंग गतिविधियों पर प्रभावकारी डीसीसी का मूल्यांकन करने के लिए अनुसंधान विभाग की कुछ प्रतिष्ठित परियोजनाएं / गतिविधियां हैं। अनुसंधान एवं विकास में ध्वनिक सुविधाओं के उन्नयन और आधुनिकीकरण की योजना के तहत एनीकोटिक चैंबर का नवीनीकरण / प्रतिस्थापन पूरा कर लिया गया है।
चैनल, आंतरिक और बाहरी, विविध भारती और क्षेत्रीय शा वे सेवाओं को नियमित रूप से आकाशवाणी चैनलों को स्टेशनों पर ले जाने वाले इंटरफ्रेंस की पहचान और निगरानी। इन निगरानी का अवलोकन सुधारात्‍मक कार्रवाई करने के लिए किया गया था। गणतंत्र दिवस, राष्ट्रीय खेल, राष्ट्रीय कार्यक्रम, वीवीआईपी प्रसारण और अन्य महत्वपूर्ण आयोजनों पर अंतिम रूप देने के लिए प्रत्येक एरियल / आवृत्ति अनुसूची को अंतिम रूप देने से पहले विभिन्न चैनलों पर विशेष निगरानी रखी गई। 01.03.2018 से 31.03.2019 के दौरान नीचे दी गई जानकारी के अनुसार विशेष मॉनीटरिंग की गई: